नवीनतम समाचार

उसूले फ़िक़्

उसूले ए फ़िक़्ह की तारीफ़: (उन क़वाइद का इल्म जिनके ज़रीये अहकामे ए शरीया को तफ़सीली दलाइल से मुस्तंबित किया जाये) इस तारीफ़ से ये वाजेह है कि इस फ़न में सारी बहस क़वाइद पर है और यूं ये फ़न इल्मे ए फ़िक़्ह से अलैहदा एक इल्म है क्योंकि फ़िक़्ह …

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इस्लाम 21 वी सदी मे

चौदाह सौ साल गुजरने के बाद खिलाफत का निज़ाम क्योंकर क़ाबिले अमल हैं? गुज़िश्ता सदी में इश्तिराकियत (साम्यवाद) के दाइयों ने ईरतक़ा (Evolution) के फलसफे की बड़ी शद व मद से तश्हीर की यहां तक कि मुस्लिम मुफक्करिन भी इस सोच से मुतास्सिर हुए बगैर न रह सके। इन हज़रात …

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इज्तिहाद

इज्तिहाद की तारीफ़: استفراغ الوسع في طلب الظن بشيء من الأحکام الشرعیہ علی وجہ یحس من نفسہ العجز عن المزید فیہ (अहकामे शरईया से ज़न की तलाश में (पूरी) ताक़त ऐसे सर्फ़ (खर्च) कर देना कि इस में मज़ीद तलाश के लिए अपने में आजिज़ी महसूस हो)। इस जामेअ और …

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अशिया का असल हुक्म

अल्लाह سبحانه وتعال का फ़रमान है: هُوَ ٱلَّذِى خَلَقَ لَكُم مَّا فِى ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعً۬ا अल्लाह वही है जिस ने सब कुछ तुम्हारे लिए पैदा किया है (अल बक़राह-29) यहां अल्लाह سبحانه وتعال ने हमारे लिए तमाम चीज़ों को मुबाह कर दिया है और यहीं से अशिया का मुन्दर्जा ज़ैल क़ायदा …

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अफ़आल का असल हुक्म

किसी चीज़ के जायज़ होने का मतलब हर्गिज़ ये नहीं है कि इस से मुताल्लिक़ा तमाम अफ़आल ख़ुदबख़ुद जायज़ हो जाएंगे, बल्कि हर फे़अल के लिए दलील दरकार है। उसकी वजह ये है कि हुक्मे शरई, बंदों के अफ़आल से मुताल्लिक़ शारेअ का वो ख़िताब है जो उनके मुआलिजात (मसाइल …

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हुक्मे शरई

हुक्मे शरई की तारीफ़: خطاب الشارع المتعلق بأفعال العباد بالإقتضاء أو بالتخییرأو بالوضع (बंदों के अफ़आल से मुताल्लिक़ शारे का वो ख़िताब जो तलब या इख़्तियार देने या वज़ा के साथ किया गया है) अगरचे शारे अल्लाह ताला है मगर यहां ख़िताब अल्लाह के बजाय खिताबे शारे इस वजह से …

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दावत की शुरूआत – 3

आप की सल्ल0 की बेसत के शुरू से इस्लामी दावत की बात ज़ाहिर ओ वाज़ेह थी, मक्के के लोग जानते थे के मोहम्मद सल्ल0 एक नये दीन की तरफ़ दावत दे रहे हैं और कई लोग आप (صلى الله عليه وسلم) के साथ भी हो गये हैं अहले मक्का यह …

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सहाबा-ए-किराम की तर्बियत – 2

अपनी दावत के इ़ब्तिदाअ़ी दौर में आप (صلى الله عليه وسلم) ने लोगों की उ़म्र, हैसिय्यत, जिन्स, अस्ल और नस्ल से क़तअे नज़र हर उस शख़्स को दावत दी जिस में आप (صلى الله عليه وسلم) ने उसे कु़बूल करने की इस्तेदाद देखी, आप (صلى الله عليه وسلم) लोगों को …

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अल्लाह के रसूल (صلى الله عليه وسلم) की नबुव्वत का आग़ाज़ – 1

जब अल्लाह के रसूल सल्ल0 अल्लाह की तरफ़ से तमाम इंसानियत के लिये इस्लाम का पैग़ाम लेकर आये तो सबसे पहले आप सल्ला0 ने अपनी ज़ौजा हज़रत ख़दीजतुल-कुबरा (रज़ि0) को दावत दी और वोह ईमान लाईं फिर आप सल्ला0 ने अपने चचा ज़ाद भाई हज़रत अ़ली इब्ने अबी तालिब रज़ि0 …

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ख़िलवत और जिलवत में ख़ौफे इलाही

अल्लाह रब्बुलइज़्ज़त की ख़शीयत (डर) का होना फ़र्ज़ है,और किताब और सुन्नत इस पर दलील हैं, चुनांचे अल्लाहسبحانه وتعالیٰ ने कु़रान मजीद में इसका ज़िक्र फ़रमायाः وَ اِيَّايَ فَاتَّقُوْنِ और मुझ से ही डरो। (तर्जुमा मआनिये क़ुरआने करीम: बक़रह – 41) وَ اِيَّايَ فَارْهَبُوْنِ और मुझ ही से ख़ौफ़ खाओ …

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क़ुरआन मजीद की तिलावत का एहतिमाम

क़ुरआन मजीद की तिलावत का एहतिमामक़ुरआन-ए-करीम अल्लाह रब उल इज़्ज़त का कलाम है जो लफ़ज़न और माअ़नन बज़रीया वही हज़रत जिब्रईल ह हज़रत मुहम्मद  के पास लाए इस की तिलावत इ़बादत है, ये कलाम मोजिज़ा है और तवातुर के साथ मन्क़ूल है। لَّا يَاْتِيْهِ الْبَاطِلُ مِنْۢ بَيْنِ يَدَيْهِ وَ لَا …

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अल्लाह से पुर उम्मीद रहना और मायूस ना होना

अल्लाह سبحانه وتعالیٰ से पुर उम्मीद होने का तकाज़ा ये है के उस से हुस्ने ज़न (अच्छा गुमान) रखा जाये। और अल्लाह से हुस्ने ज़न ये है के उसकी रहमत से मायूस ना हो। उसकी नुसरत और मदद, उसकी रहमत और मग़फ़िरत और कुशादगी का तलबगार रहे, जिस तरह रब …

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अल्लाह के ज़िक्र और ख़ौफ़ के सबब गिरिया ओ ज़ारी

ख़ौफ़े खुदावंदी से रोना एक मंदूब फेअ़ल है और ये किताब और सुन्नत दोनों से साबित है। चुनांचे अल्लाह سبحانه وتعالیٰ फ़रमाता हैः اَفَمِنْ هٰذَا الْحَدِيْثِ تَعْجَبُوْنَۙ   (*) وَ تَضْحَكُوْنَ وَ لَا تَبْكُوْنَۙ अब क्या तुम इस कलाम पर ताज्जुब करते हो? और हंसते हो और रोते नहीं? (तर्जुमा मआनिये …

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अल्लाह और उसके रसूल से मुहब्बत

इमाम ज़ोहरी फ़रमाते हैं:  बंदे की अल्लाह और रसूल (स्वलल्लाहो अलैयहिवसल्लम) से मुहब्बत के मानी उनकी फ़र्मांबरदारी और उनके अहकाम की ताबेदारी है। अ़ल्लामा बैज़ावी फ़रमाते हैं:  मुहब्बत इताअ़त का नाम है। इब्ने अ़रफ़ाकहते हैं:  एहले अ़रब के नज़दीक मुहब्बत के मानी किसी चीज़़ का इरादा करना और इसका क़स्द …

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बांग्लादेश ने हिज्ब उत् तहरीर पर प्रतिबन्ध लगाया

पूंजीवादी मीडिया का इस्लाम और इस्लामी आन्दोलनो की गतिवीधियों को पेश करने का अपना एक खास तरीका है। एक जीवन व्यवस्था की हैसियत से इस्लाम का आज पूंजीवाद के साथ सीधा मुकाबला है। एक इंसानी विचारधारा होनी की हैसियत से पूंजीवाद का अंत हो जाना उस का मुक़द्दर है। जब …

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